नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) क्या है?

What is Cash Reserve Ratio (CRR)? नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) क्या है?

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Q. नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) क्या है?
Ans. भारत में, बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत तरल नकदी के रूप में रखना आवश्यक है। हालांकि, बैंक इस तरल नकदी को भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा करना पसंद करते हैं, जो हाथ में नकदी होने के बराबर है। जमा का वह प्रतिशत जो बैंकों को अलग रखना चाहिए, नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है। सीआरआर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय किया जाता है। उदाहरण के लिए: यदि बैंक जमा राशि 100 रुपये है और सीआरआर प्रति वर्ष 10% है, तो बैंक के पास हर समय तरल नकदी 10 रुपये होनी चाहिए। शेष धनराशि, जो इस मामले में 90 रुपये है, का उपयोग उधार और निवेश उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। RBI के पास CRR के माध्यम से भारत में बैंकों की उधार क्षमता निर्धारित करने की शक्ति है। वे सीआरआर बढ़ाएंगे यदि वे उस राशि को कम करना चाहते हैं जो बैंक उधार दे सकते हैं और इसके विपरीत। वर्तमान सीआरआर 4% प्रति वर्ष है।


Q. Nakad aarakshit anupaat (see aar aar) kya hai?

Ans. bhaarat mein, bainkon ko apanee jama raashi ka ek nishchit pratishat taral nakadee ke roop mein rakhana aavashyak hai. haalaanki, baink is taral nakadee ko bhaarateey rijarv baink ke paas jama karana pasand karate hain, jo haath mein nakadee hone ke baraabar hai. jama ka vah pratishat jo bainkon ko alag rakhana chaahie, nakad aarakshit anupaat kahalaata hai. seeaaraar bhaarateey rijarv baink dvaara tay kiya jaata hai. udaaharan ke lie: yadi baink jama raashi 100 rupaye hai aur seeaaraar prati varsh 10% hai, to baink ke paas har samay taral nakadee 10 rupaye honee chaahie. shesh dhanaraashi, jo is maamale mein 90 rupaye hai, ka upayog udhaar aur nivesh uddeshyon ke lie kiya ja sakata hai. rbi ke paas chrr ke maadhyam se bhaarat mein bainkon kee udhaar kshamata nirdhaarit karane kee shakti hai. ve seeaaraar badhaenge yadi ve us raashi ko kam karana chaahate hain jo baink udhaar de sakate hain aur isake vipareet. vartamaan seeaaraar 4% prati varsh hai.


Q. What is Cash Reserve Ratio (CRR)?
Ans. In India, banks are required to retain a certain percentage of their deposits as liquid cash. However, banks prefer to deposit this liquid cash with The Reserve Bank of India, which is equivalent to having cash in hand. The percentage of the deposits that should be kept aside by banks is called Cash Reserve Ratio. CRR is fixed by The Reserve Bank of India. For example: If the bank deposit amount is Rs.100 and the CRR is 10% per annum, the liquid cash that the bank should have at all times is Rs.10. The remaining funds, which is Rs.90 in this case can be used for lending and investment purposes. RBI has the power to determine the lending capacity of the banks in India through CRR. They will increase CRR if they want to reduce the amount that the banks can lend and vice versa. The current CRR is 4% p.a.


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3 thoughts on “नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) क्या है?

  1. Xahana Study24Hours Team says:

    भारतीय रिजर्व बैंक हर दो महीने में एक बार मोनेटरी पॉलिसी की समीक्षा करता है. मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान हर बार रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द आते हैं. आइये हम आपको रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर का मतलब बताते हैं. इससे आप यह भी समझ सकेंगे कि इन दरों में बदलाव से आपके जीवन में क्या असर पड़ता है.

    1. रेपो रेट क्या है.
    जब हमें पैसे की जरूरत हो और अपना बैंक अकाउंट खाली हो तो हम बैंक से कर्ज लेते हैं. इसके बदले हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं. इसी तरह बैंक को भी अपनी जरूरत या रोजमर्रा के कामकाज के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है. इसके लिए बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं. बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक को जिस दर ब्याज चुकाते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं.

    रेपो रेट का आप पर असर
    जब बैंक को रिजर्व बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा तो उनके फंड जुटाने की लागत कम होगी. इस वजह से वे अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं. इसका मतलब यह है कि रेपो रेट कम होने पर आपके लिए होम, कार या पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें कम हो सकती हैं.

    अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ा देता है तो बैंकों को पैसे जुटाने में अधिक रकम खर्च करनी होगी और वे अपने ग्राहकों को भी अधिक ब्याज दर पर कर्ज देंगे.

  2. Dipti Thakur says:

    3. नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) भारत में कामकाज कर रहे बैंकों के लिए कुछ दिशा निर्देश बनाए गए हैं. ये नियम रिजर्व बैंक ने बनाये हैं. बैंकिंग नियमों के तहत हर बैंक को अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना ही होता है. इसे कैश रिजर्व रेश्यो अथवा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) कहते हैं. आरबीआई ने ये नियम इसलिए बनाए हैं, जिससे किसी भी बैंक में बहुत बड़ी संख्या में ग्राहकों को रकम निकालने की जरूरत पड़े तो बैंक पैसे देने से मना न कर सके. सीआरआर का आप पर क्या प्रभाव पड़ता है? अगर सीआरआर बढ़ता है तो बैंकों को अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखना होगा. इसके बाद देश में कामकाज कर रहे बैंकों के पास ग्राहकों को कर्ज देने के लिए कम रकम रह जाएगी. आम आदमी और कारोबारियों को कर्ज देने के लिए बैंकों के पास कम पैसे रहेंगे. अगर रिजर्व बैंक सीआरआर को घटाता है तो बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ जाता है. आरबीआई सीआरआर में बदलाव तभी करता है, जब बाज़ार में नकदी की तरलता पर तुरंत असर नहीं डालना हो. वास्तव में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव की तुलना में सीआरआर में किए गए बदलाव से बाज़ार में नकदी की उपलब्धता पर ज्यादा वक्त में असर पड़ता है

  3. Sexy Queen RIYA says:

    4. एसएलआर क्या है?
    Ans. रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में नकदी की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिन उपायों का सहारा लेता है उनमें एसएलआर एक महत्वपूर्ण उपाय है. स्टेचुअरी लिक्विडिटी रेश्यो या वैधानिक तरलता अनुपात बैंकों के पास उपलब्ध जमा का वह हिस्सा होता है, जोकि उन्हें अपनी जमा पर लोन जारी करने के पहले अपने पास रख लेना जरूरी होता है. एसएलआर नकदी, स्वर्ण भंडार, सरकारी प्रतिभूतियों जैसे किसी भी रूप में हो सकता है. जब बैंक इस अनुपात को सुरक्षित रख लेते हैं, उसके बाद ही उन्हेें अपनी जमा पर लोन जारी करने की अनुमति होती है. एसएलआर का यह अनुपात कितना होगा, इसका निर्धारण रिजर्व बैंक करता है. भारत में एसएलआर की अधिकतम सीमा 40 फीसदी तक रह चुकी है. रिजर्व बैंक को बैंकों के लिए एसएलआर की सीमा 40 फीसदी और न्यूनतम शुन्य फीसदी तक भी रखने का अधिकार है.

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